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Rise of Hallyu and the Korean Novels

Hallyu and the Korean Novels 

Hallyu and the Korean Novels

‘हल्ल्यू’ (एक परिचय):

आज विश्व भर के युवा कोरियाई सांस्कृतिक लहर की चपेट में हैं. क्या पूरब और क्या पश्चिम, यह लहर इतनी तीव्र है, कि, कोरियाई संस्कृति से वाक़िफ़ दुनिया के हर कोने के नौजवान या नवयुवती अपने जीवनकाल में एक बार इस देश, दक्षिण कोरिया, को बस देख भर लेना चाहते हैं; मानो, दक्षिण कोरिया कोई देश ना होकर, आधुनिक युग का सांस्कृतिक तीर्थस्थल या धरती का स्वर्ग बन गया हो. पूरी दुनिया की युवा पीढ़ी आज कोरियाई भोजन, संगीत, नाटक, सौन्दर्यबोध, वाद्य-यन्त्र, सिनेमा तथा पुस्तकों की दीवानी हो चुकी लगती है. 

दक्षिण कोरिया की सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था की वैश्विक लोकप्रियता की इस लहर को — जिसमें, यहाँ से पॉप संस्कृति, संगीत (K-Pop), मनोरंजन, टेलिविज़न ड्रामा (K-Dramas) तथा मूवीज़ का निर्यात दूसरे देशों में होता है — हम, आमतौर पर, ‘कोरियाई लहर’ या ‘हल्ल्यू (Hallyu)’ के नाम से जानते हैं. ‘हल्ल्यू (Hallyu),’ एक चाईनीज़ शब्द है, जिसका हिन्दी अनुवाद में शाब्दिक अर्थ होगा ‘कोरियाई लहर’. जब हम इस लहर की बात करते हैं, तो उस समय हम कोरियाई संस्कृति के विभिन्न आयामों; जैसे कि, संगीत, ऑनलाइन गेम्ज़, चलचित्र, नाटक से लेकर, कोरियाई खान-पान तक के, वैश्विक समाज पर पड़े, गहरे प्रभाव की बात कर रहे होते हैं. 

दक्षिण कोरिया, आज उन चंद देशों की सूची में सम्मिलित है, जो, लोक संस्कृति के निर्यातक देशों के बीच सर्वश्रेष्ठ स्थान पाने का उद्देश्य रखते हैं. यह, अर्थव्यवस्था का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा होने के साथ ही, दक्षिण कोरिया द्वारा, अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्धों में, सर्वाधिक सौम्य शक्ति या मृदु शक्ति (Soft Power) वाला देश बनने की एक कोशिश भी है. वर्ष 2021 के एक सर्वेक्षण के अनुसार, आज के समय में, सर्वाधिक ‘सॉफ़्ट पॉवर’ वाले देशों की फ़ेहरिस्त में जर्मनी सबसे ऊपर, तथा, जापान, यूनाइटेड किंग्डम तथा कनाडा, क्रमशः दूसरे, तीसरे तथा चौथे स्थानों पर हैं; जबकि, चीन तथा दक्षिण कोरिया, इस सूची में अभी क्रमशः आठवें तथा ग्यारहवें स्थानों पर है. 

वर्ष 2020 में ‘सॉफ़्ट पॉवर’ वाले देशों के बीच, भारत का स्थान सत्ताईसवाँ था, जो कि, वर्ष 2021 में, भारत में हो रहे कुछ विरोध प्रदर्शनों की वजह से, नीचे फिसल कर छत्तीसवें पर पहुँच गया. भारत ने, पिछले कुछ सालों में, शास्त्रीय संगीत, बॉलीवुड, शास्त्रीय नृत्य, साहित्य, मूर्तिकला, चित्रकला, वास्तुकला, संयुक्त राष्ट्र के ‘शांति अभियानों’, आध्यात्मिकता, अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस, ध्यान, कला और दर्शन इत्यादि के बूते ‘सॉफ़्ट पॉवर’ वाले देशों के बीच अपनी छवि काफ़ी सशक्त की थी. भारत द्वारा किया गया सार्क सैटेलाईट का प्रक्षेपण भी दक्षिण-पूर्व एशियाई क्षेत्र में ‘सॉफ़्ट पॉवर’ कूटनीति का एक हिस्सा था.

पृष्ठभूमि (आर्थिक, सामाजिक तथा राजनीतिक)

‘हल्ल्यू (Hallyu)’ का विकास कोई अनियोजित या आकस्मिक एक दिवसीय घटना नहीं थी. इस लहर के दृष्टिगोचर होने के पहले से ही दक्षिण कोरिया के समाज में एक सांस्कृतिक माहौल का निर्माण होने लगा था. यह लहर साल 1999 में एक महत्त्वपूर्ण सांस्कृतिक घटना के रूप में विश्व के सामने आयी थी, और तब से ही, लगातार विकसित हो रही है. कोरियाई पॉप संगीत (K-Pop), संगीत की दुनिया में, लगातार 15 वर्षों से, विश्व के ऊपर राज कर रहा है. ‘हल्ल्यू (Hallyu)’ के कई वरदान दक्षिण कोरिया को मिले हैं, जिनमें से प्रमुख हैं; व्यापार में बढ़ोतरी, सामाजिक-सांस्कृतिक सम्पन्नता, कला तथा मनोरंजन जगत में कोरियाई सितारों का उदय तथा इनकी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक विशिष्ट पहचान, पर्यटन में बढ़ोतरी, तथा विश्व पटल पर कोरिया की स्वयं तथा सम्पूर्ण एशियाई संस्कृति की सशक्त छवि का उदय. यही वजह रही है, कि, पिछले बीस वर्षों के अन्तराल में, दक्षिण कोरिया एक अत्यंत अमीर तथा अत्याधुनिक देश बनकर उभरा है. 

‘हल्ल्यू (Hallyu)’ के आगमन के पीछे कुछ महत्त्वपूर्ण कारक थे :

स्थानीय कोरियाई लोगों के ऊपर विदेश यात्रा को लेकर लगे प्रतिबन्ध का हटना

1990 के दशक के पूर्वार्ध में, दक्षिण कोरिया की सरकार द्वारा, कोरिया के निवासियों के ऊपर लगे विदेश यात्रा के निषेध को हटा दिया गया; जो, वास्तव में, हल्ल्यू (Hallyu) के आगमन के पीछे का एक महत्त्वपूर्ण कारक बना. इस प्रतिबन्ध के हटते ही बहुत सारे कोरियाई नागरिक पश्चिम; ख़ासकर, अमेरिका तथा यूरोप के सम्पर्क में आये. यहाँ के कई विद्यार्थी इन देशों में शिक्षा ग्रहण करने गये, वहाँ रहकर विभिन्न कम्पनियों में नौकरियाँ कीं; और, नब्बे के दशक के उत्तरार्ध में कोरिया लौट कर आये. ये नागरिक अपने साथ व्यापार करने का एक नया नज़रिया; कला, सिनेमा, तथा संगीत जगत के विश्लेषण हेतु नयी सूक्ष्म दृष्टि, तथा, अभिव्यक्ति के नये तौर-तरीक़ों को साथ लेकर आये थे. इसका परिणाम यह हुआ, कि, अब कोरिया के अन्दर ही एक अति-मेधावी, ताज़ा, तथा ऊर्जामय युवाओं का समूह, अपनी रचनात्मकता को अभिव्यक्ति प्रदान करने हेतु बेचैनी से सम्भावनाओं की तलाश करने में जुटा था.

कोरियाई शाईबोल (chaebol) का पुनर्गठन

जिस समय कोरिया की सरकार ने अपने नागरिकों की विदेश यात्रा के ऊपर लगे प्रतिबन्ध को हटाया; लगभग उसी दौरान, सम्पूर्ण एशियाई क्षेत्र, वर्ष 1997-98 के गम्भीर वित्तीय संकट (severe financial crisis) के दौर से गुजर रहा था. यह संकट एक झंझावत था, जिसमें डूबते ऋण, देनदारों के बीच बढ़ती घबराहट, तथा, अन्य क्षेत्रीय आर्थिक चुनौतियाँ शामिल थीं. 

एशिया के इस वित्तीय संकट ने ख़ासकर कोरिया की वैश्विक छवि को काफ़ी धूमिल किया था. इस संकट के दौरान, बाहरी देश, कोरिया की अर्थव्यवस्था को संदेह की दृष्टि से देखने लगे थे, और, इसलिये, इस समय कोरिया में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (foreign direct investment) नहीं आ रहे थे. आज भले ही दुनिया भर के लोग दक्षिण कोरिया में बसने का सपना पाले बैठे हों; लेकिन, एक समय वह भी था, जब दक्षिण कोरिया घूमने विरला ही कोई पर्यटक जाता था. कोरिया को आर्थिक संकट की इस समस्या से निजात दिलाने के लिये, उस समय के राष्ट्रपति, किम दाय-जंग (Kim Dae-jung), तथा, वैश्विक जन-सम्पर्क संस्था (global PR agency) के तत्कालीन कोरिया प्रमुख ने मिलकर एक पुस्तक लिखी, जिसका शीर्षक था, “Korea : On Course — and Open for Business”. यह पुस्तक वर्ष 1999 में प्रकाशित हुई.

इस वित्तीय संकट का सबसे ज़्यादा प्रभाव कोरिया के शाईबोल्स (chaebols) पर पड़ा. शाईबोल्स (chaebols), एक ही परिवार द्वारा चलाये जा रहे व्यापारों के समूह होते थे; जिन्हें, हम दक्षिण कोरिया में, सत्तर के दशक में सर्वत्र व्याप्त, औद्योगिक शोषण की दुकानों (industrial sweatshops) के तौर पर देख सकते हैं. एशियाई वित्तीय संकट से पहले, ये शाईबोल्स (chaebols), कोरिया की अर्थव्यवस्था के हर क्षेत्र में सक्रिय थे; और, चिप से लेकर जहाज़ तक बनाने का काम करते थे. वित्तीय संकट के दौरान इन शाईबोल्स (chaebols) को अपने बिज़नेस मॉडल को पुनर्गठित करने के लिये मज़बूर होना पड़ा; और, इसके बाद इन्होंने उन्हीं क्षेत्रों में काम करना शुरू किया, जिनमें इन्हें दक्षता हासिल थी. इस परिवर्तन ने देश के अन्दर ही बाज़ार को आम लोगों के लिये खोल दिया; और, अब चंद परिवारों की जगह अन्य छोटे व्यापारियों के सामने उत्पादन के विभिन्न क्षेत्रों में सम्भावनाओं के द्वार खुल गये. कोरिया के इस संकट ने कई सफल दक्षिण कोरियाई उद्यमियों को जन्म दिया. 

किम दाय-जंग (Kim Dae-jung) की सरकार को अब यह पता लग गया था, कि, कोरिया की सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था शाईबोल्स (chaebols) पर बुरी तरह निर्भर थी; यानि कि, शाईबोल्स (chaebols) की विफलता का मतलब था, पूरे देश की विफलता! शाईबोल्स (chaebols) पर आधारित कोरियाई अर्थव्यवस्था का वर्तमान तथा भविष्य देखते हुये, तत्कालीन राष्ट्रपति, किम दाय-जंग (Kim Dae-jung) ने सूचना तकनीक (information technology) तथा लोक संस्कृति (popular culture) को कोरियाई अर्थव्यवस्था का महत्त्वपूर्ण हिस्सा बनाने का निश्चय किया. 

कोरियाई अभिवेचन-व्यवस्था (censorship laws) का हटना

कोरियाई अभिवेचन-व्यवस्था के कारण कई सारे फ़िल्म निर्माता तथा दूसरे कलाकार उन विषयों पर काम नहीं कर पा रहे थे, जिन्हें, इस व्यवस्था ने विवादित घोषित कर रखा था; जिस वजह से, कई अरसों तक इन कलाकारों की रचनात्मक स्वतंत्रता दमित रही. वर्ष 1996 में, कोरिया की एक संवैधानिक अदालत ने इस प्रतिबन्ध को हटा दिया; जिसके बाद, इन कलाकारों को अपनी रचनात्मक कला के प्रदर्शन हेतु कई सारे विषय उपलब्ध हो गये. इस महत्त्वपूर्ण कदम ने कोरिया की जीवन्त युवा पीढ़ी को, सिनेमा तथा संगीत के माध्यम से नये तथा साहसिक विचारों को प्रकट करने हेतु, एक स्वतन्त्र तथा विपुल सम्भावनाओं से भरा हुआ माहौल प्रदान किया. इसी युग में कई प्रसिद्ध कोरियाई फ़िल्म निर्माताओं का उदय हुआ. इसी का परिणाम था, कि, वर्ष 2020 में सर्वोत्तकृष्ट फ़िल्म के लिये ऑस्कर्स तथा अन्य तीन अकादमी पुरस्कार जीतने वाली ‘पारासाइट’ (Parasite) पहली ग़ैर-अंग्रेज़ी भाषायी फ़िल्म बनी. इस पुरस्कार ने वैश्विक स्तर पर कोरियाई मनोरंजन उत्पादों की वास्तविकता, ख़ास पहचान तथा गुणवत्ता पर एक आधिकारिक मुहर लगा दी.

कुछ प्रमुख दक्षिण कोरियाई फ़िल्में, जिन्हें हर कोई देखना चाहता है, उनके नाम हैं — Swiri (1999), Joint Security Area (2000), The virgin stripped bare by her bachelors (2000), Ching (Friend) (2001), My Sassy Girl (2001), Failan (2001), A tale of two sisters (2002), Memories of Murder (2003), Silmido (2003), Old Boy (2003) — वर्ष 2004 के कान्स फ़िल्म समारोह (Cannes Film Fesitval) में ग्रांड प्रिक्स सम्मान हासिल; Spring, Summer, Fall, Winter….and Spring (2004), Taeguki (“Korean Flag”) (2004), King and the Clown (2005), The Host (2006), D-War (2007), Scandal Makers (2008), Haeundae (2009),The Man from Nowhere (2010), War of the Arrows (2011), The Thieves (2012), Miracle in Cell No. 7 (2013), The Admiral : Roaring Currents (2014) — सबसे ज़्यादा कमाई करने वाली कोरियाई फ़िल्म, Veteran (2015), Train to Busan (2016), A Taxi Driver (2017) — इस फ़िल्म में दक्षिण कोरिया के Gwangju शहर में, 1980 के दशक में, लोकतन्त्र के समर्थन में हुये, एक वृहद् तथा परिवर्तनकारी विद्रोह को दर्शाया गया है; Along with the Gods : The Last 49 Days (2018), Extreme Job (2019), Squid Game (2021).

महत्त्वपूर्ण दक्षिण कोरियाई कम्पनियों के द्वारा उत्पादों की ब्रांडिंग पर ज़ोर

बीसवीं सदी के, नब्बे के दशक के मध्य में ही, कोरिया के कुछ बड़े शाईबोल्स (chaebols); जैसे कि, Samsung तथा LG ने अपनी ब्राण्डिंग यात्रा की शुरुआत कर दी थी. यह ब्राण्डिंग विश्व-स्तर की होती थी, जिसमें, उत्पादों की गुणवत्ता, उनकी बनावट तथा मार्केटिंग का विशेष ध्यान रखा जाता था. ब्राण्डिंग के इस कौशल का प्रसार कोरियाई अर्थव्यवस्था के दूसरे क्षेत्रों में भी शीघ्र ही हो गया. कुल मिलाकर, आमतौर पर कोरिया में अब ऐसा माहौल बन चुका था, जहाँ, लोग किसी उत्पाद के गुणवत्ता सुधार को लेकर काफ़ी उत्साहित रहते थे; और, वे हमेशा यही चाहते थे कि विश्व बाज़ार में पहुँचने वाले उनके उत्पाद गुणवत्ता के मामले में सर्वोपरि रहें. इसी उत्साह का असर अन्य क्षेत्रों के साथ-साथ कोरियाई मनोरंजन तथा साहित्य उद्योग पर भी पड़ा. 

अर्थव्यवस्था के विकास के लिये आधारभूत ढाँचे पर विशेष ध्यान

कोरिया की सरकार ने आधारभूत संरचना; ख़ासकर, हाई-टेक इंटरनेट इंफ़्रास्ट्रक्चर पर जमकर खर्च किया; क्योंकि, इस सरकार का यह विश्वास था, कि, कोरिया के नागरिक वैश्विक समाज से जुड़कर स्वयं और देश का सही मायने में विकास कर पायेंगे. इसके अलावा, कोरिया, विश्व के उन चंद गिने-चुने देशों में भी सम्मिलित है, जो, स्टार्ट-अप कम्पनियों में अपने फण्ड का निवेश करते हैं. वर्ष 2012 में, कोरिया में, उद्यम पूँजी (venture capital) के रूप में वितरित धनराशि का पच्चीस प्रतिशत हिस्सा, सरकारी फण्ड से आया था. आज कोरिया में सम्पूर्ण उद्यम पूँजी का एक तिहाई हिस्सा मनोरंजन उद्योग पर खर्च होता है.

उपरोक्त सभी घटनायें, एक साथ, नब्बे के दशक के मध्य में घटित हुईं; जिससे, कोरियाई संस्कृति, विश्व के मंच पर केवल प्रकट ही नहीं हुई; बल्कि, लोगों के बीच सराही और अपनायी भी गयी. साझा सांस्कृतिक पृष्ठभूमि तथा संवेदनशीलता की वजह से कोरियाई पारिवारिक ड्रामा पूरे एशियाई क्षेत्र में एक बड़ी जनसंख्या के बीच लोकप्रिय रहा; और, यही वजह रही, कि, इस दौरान विश्व-बाज़ार में लोगों के बीच कोरियाई मनोरंजन के उत्पादों के लिये बढ़ती हुई दीवानगी भी दिखी. कोरिया के स्थानीय युवा गायकों तथा संगीतकारों के समूहों ने, अमेरिकी रैप-संगीत को कोरियाई रुचि के अनुरूप ढालकर, पूरी दुनिया के युवाओं को अपना मुरीद बना लिया. 

कोरियाई साहित्य तथा अंग्रेज़ी अनुवाद

वर्तमान साहित्य जगत में, कोरियाई साहित्य का लगातार, त्वरित गति से हो रहा अंग्रेज़ी अनुवाद, साहित्य एवं कला प्रेमियों के लिये, एक उत्साहवर्धक घटना से कम नहीं है. कोरियाई पुस्तकों को आलोचकों तथा आम लोगों ने एक साथ जमकर सराहा है; ख़ासकर, Please Look After Mom, तथा, बहुचर्चित, The Vegetarian (अंतर्राष्ट्रीय मैन बुकर पुरस्कार प्राप्त), के अंग्रेज़ी अनुवादों के बाद से, दक्षिण कोरियाई पुस्तकों के अंग्रेज़ी अनुवाद की दुनिया में एक तेज़ी आयी है. साहित्य-प्रेमी, नित नये पसंदीदा कोरियाई लेखकों, तथा, उनकी पुस्तकों के अनुवादकों की खोज में लगे हुये हैं. Deborah Smith (अनुवाद कार्यों के लिये अंतर्राष्ट्रीय बुकर प्राइज़ प्राप्त), Sora Kim-Russell, Ha-yun Jung, Janet Hong, Bruce, Ju-Chan Fulton, Anton Hur, Ji Yoon Lee, Chi-Young Kim तथा Lizzie Buehler कुछ प्रमुख, कोरियाई साहित्य के, अंग्रेज़ी अनुवादकों के नाम हैं.

अन्य माध्यमों की अपेक्षा, पुस्तकों के माध्यम से हम दक्षिण कोरियाई संस्कृति को गहरायी तथा बेहतर तरीक़े से समझ सकते हैं. आइये, पुस्तकों की एक संक्षिप्त सूची से यह समझने का प्रयास करते हैं, कि, कौन सी चीज़ इस छोटे से देश को इतना ख़ास और सुंदर बनाती है. इन पुस्तकों को पढ़ते हुये आप भी कोरियाई संस्कृति के सागर में गोते लगा सकते हैं.

कुछ प्रमुख, दक्षिण कोरियाई लेखकों के नाम एवं उनके द्वारा रचित पुस्तकों की सूची :

  • Adam Johnson The Orphan Master’s Son (2012)
  • Bae Suah A Greater Music (2003), Recitation (2011) , Nowhere to be Found (2015) — Translated by Sora Kim-Russell, Untold Night and Day (2020) — Translated by Deborah Smith
  • Bae Myung-hoon Tower (2021)
  • Bora Chung — Cursed  Bunny (2021)
  • Chang-Rae Lee The Surrendered (2008)
  • Cho Nam-joo Kim Jiyoung, Born 1982 (2016)
  • Choi Eunyoung Shoko’s Smile (2016)
  • Elisa Shua Dusapin (एक फ़्रांसीसी लेखिका) — Winter in Sokcho (2016)
  • Eugenia Kim The Calligrapher’s Daughter (2009)
  • Gong Ji-Young — Our Happy Time (2005)
  • Ha Seong-nan —  Flowers of Mold (1999), Bluebeard’s First Wife (2020) — Translated by Janet Hong
  • Haemin Sunim — The Things You Can See Only When You Slow Down (2012), Love for Imperfect Things : How to Accept Yourself in a World Striving for Perfection (2016)
  • Han Kang — The Vegetarian (2007) — Translated by Deborah SmithHuman Acts (2014) — Translated by Deborah SmithThe White Book (2016)
  • Han Yujoo The Impossible Fairy Tale (2013)
  • Hwang Jungeun One Hundred Shadows (2016)
  • Hwang Sok-yong The Guest (2002), Princess Bari (2013), At Dusk (2018)
  • Hye-young Pyun — The Hole (2017) — Translated by Sora Kim-RussellThe Law of Lines (2020)
  • Jang Eun-jin No One Writes Back (2013)
  • Jihyun Yun Some Are Always Hungry (2020)
  • Kang Kyeong-ae The Underground Village (1936)
  • Kim Ae-ran — My Brilliant Life (2021)
  • Kim Bo-young — I’m Waiting for You and Other Stories (2021)
  • Kim Sagwa Mina (2013) — Translated by Bruce and Ju-Chan Fulton, b, Book, and Me (2020) — Translated by Sunhee Jeong
  • Kim Un-su The Plotters (2010), The Cabinet (2021)
  • Kim Yideum Blood Sisters (2019) — Translated by Ji Yoon Lee 
  • Kim Young-ha Black Flower (2012)
  • Krys Lee Drifting House (2012)
  • Kyung-Ran Jo Tongue (2007)
  • Kyung-sook Shin — Please Look After Mom (2008) — Translated by Chi-Young Kim, The Girl Who Wrote Loneliness (2015) — Translated by Ha-yun JungThe Court Dancer (2018) — Translated by Anton Hur 
  • Lee Ki-ho At Least We Can Apologise (2013)
  • Linda Sue Park When my Name was Keoko (2002)
  • Lisa See The Island of Sea Women (2019)
  • Maangchi — Maangchi’s Real Korean Cooking (2015)
  • Masaji Ishikawa A River of Darkness : One Man’s Escape from North Korea (2000)
  • Mi-ae Seo The Only Child (2010)
  • Min Jin Lee Pachinko (2017)
  • Paek Nam-nyong — Friend : A Novel from North Korea (2020)
  • Park Seongwon — What Makes a City? (2019)
  • Sang Young Park Love in the Big City (2019)
  • Sumi Hahn — The Mermaid from Jeju (2020)
  • Sun-Mi Hwang — The Hen Who Dreamed She Could Fly (2000)
  • Suki Kim The Interpreter (2003)
  • Yi Mun-yol Our Twisted Hero (1987)
  • You-jeong Jeong Seven Years of Darkness (2011), The Good Son (2016) 
  • Yun Ko-eunThe Disaster Tourist (2013) — Translated by Lizzie Buehler
  • Won-pyung Sohn Almond (2017)

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