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Top 10 Must Read Books for Prospective Law Students

A List of Ten Must Read Books for Prospective Law Students 

Top 10 Must Read Books for Law Students

जब भी आप विश्वविद्यालयों में नामांकन के लिये आवेदन डाल रहे होते हैं, तो आपको अक्सर यह सलाह दी जाती है कि अच्छी तैयारी के लिये आप अपने विषय से सम्बन्धित पुस्तकों को पढ़ें. लेकिन, आप तब स्वयं को असमंजस में पाते हैं; जब, आपको पता ही नहीं होता कि शुरुआत कहाँ से करनी है, या, पुस्तकों के भण्डार में से कौन सी पुस्तकों को चुनकर पढ़ना है. क़ानून का विषय स्वयं ही अपनी जटिलता तथा अगम्य प्रकृति के लिये जाना जाता है; ऐसे में, इस विषय से सम्बन्धित लिखे साहित्य में से ज़रूरी पुस्तकों को चुनकर पढ़ना भी अपने आप में एक चुनौतीपूर्ण कार्य लगता है. इस समस्या को कुछ आसान बनाने हेतु यहाँ क़ानून से सम्बन्धित अपरिहार्य पुस्तकों की एक सूची दी जा रही है, जहाँ से आप अपने मनमुताबिक किसी पुस्तक को चुनकर इस यात्रा की शुरुआत कर सकते हैं. 

चुकि, शायद, आप में से बहुत लोग, अभी क़ानून सम्बन्धी अपनी पुस्तकों की यात्रा के शुरुआती दौर में ही हैं; इसलिये, यहाँ कोशिश यही है, कि, इस सूची में उपलब्ध पुस्तकें सहज, सुगम्य तथा रोचक हों. यह यात्रा अपने शुरुआती दौर में ही नीरस और उबाऊ न बन जाये, इसलिये, इस सूची में क़ानून सम्बन्धी शैक्षिक पुस्तकों की जगह; साहित्यिक गल्प, जीवनी तथा कथेतर पुस्तकों को रखा गया है. 

मस्तिष्क के किसी भी तार को झंकृत किये बिना ही, इन पुस्तकों की सूची पर एक नज़र डालने के बाद, आपको यह तो समझ में आ ही जायेगा कि क़ानून क्यों होता है; और, इन सभी पुस्तकों को पढ़ लेने के बाद, आपको यह भी थोड़ा-बहुत समझ में आ जायेगा, कि, क़ानून में क्या-क्या होता है. आगे के लेखों में हम क़ानून सम्बन्धी कुछ जटिल पुस्तकों पर भी चर्चा करेंगे. फ़िलहाल, यह यात्रा शुरू करते हैं. 

(पढ़ायी की प्रक्रिया रोचक तथा उपयोगी दोनो होनी चाहिये; इसके लिये, क़ानून सम्बन्धी पुस्तकों की सूची में, सबसे पहले स्थान पर, हमने गल्प को रखा है.)

Fiction 

1. Bleak House — Charles Dickens 

चार्ल्स डिकेंस, अंग्रेज़ी साहित्य के विक्टोरीयन युग के, एक महान ब्रिटिश लेखक थे; और, Bleak House, उनकी सर्वोत्तम रचनाओं में से एक मानी जाती है. यह पुस्तक वर्ष 1853 में प्रकाशित हुयी थी. यह कहानी Jarndyce परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है, जो कि, एक लम्बे समय से विवादित सम्पत्ति को लेकर चल रहे मुक़द्दमे, Jarndyce and Jarndyce, से समझौते के फलस्वरूप धनराशि प्राप्त करने का, व्यर्थ में ही इंतज़ार कर रहा है. इस उपन्यास के द्वारा इंग्लैन्ड के Court of Chancery की आलोचना की गयी है, जहाँ अदालत की जटिल प्रक्रियाओं तथा विभिन्न क़ानूनी पैंतरेबाजियों की वजह से, मामले दशकों तक लम्बित पड़े रहते हैं. Jarndyce and Jarndyce का मामला भी पीढ़ियों से चला आ रहा है; जिसके फलस्वरूप, यह इतना पेंचीदा हो जाता है, कि, तत्कालीन समय में कोई भी पक्ष उस मामले को समझ पाने में पूरी तरह असमर्थ है. 

2. To Kill a Mockingbird — Harper Lee 

यह पुस्तक अमेरिकी लेखक Harper Lee द्वारा लिखी गयी थी, जो, वर्ष 1960 में प्रकाशित हुयी. इस पुस्तक में अमेरिका के दक्षिणी भाग में व्याप्त नस्लवाद तथा पूर्वाग्रह को एक छोटे बच्चे की संवेदनशील नज़रों से दिखाया गया है; जिसकी वजह से, इस उपन्यास को काफ़ी वाहवाही मिली. इस पुस्तक में, एक प्रसिद्ध (विधुर) लॉयर अपने दो छोटे बच्चों को न्यायप्रिय और संवेदनशील होने की प्रेरणा देता है; और, साथ ही उन्हें यह भी बताता है; कि, Mocking Bird को मारना एक बड़ा पाप इसलिये है, क्योंकि, यह चिड़िया अहिंसक प्रवृत्ति की तथा मासूमियत से भरी होती है. 1961 में इस पुस्तक को पुलित्ज़र पुरस्कार भी हासिल हुआ. आज यह अमेरिकी विद्यालयों में सबसे ज़्यादा पढ़ाया जाने वाला उपन्यास है. इस पुस्तक का चालीस भाषाओं में अनुवाद भी हुआ है; और, पूरे विश्व में, अब तक, इसकी चार करोड़ से ज़्यादा कापियाँ बिक चुकी हैं. 

3. Letters to a Law Student — Nicholas McBride

वर्ष 2006 में प्रकाशित, यह पुस्तक, क़ानून की पढ़ायी के इच्छुक भावी विद्यार्थियों के लिये, 30 चिट्ठियों के एक संकलन के रूप (epistolary format) में लिखी गयी है; जो उन्हें, यह बताती है कि क़ानून की पढ़ायी उनके लिये एक सही चुनाव होगा या नहीं; तथा, पहले सत्र की पढ़ायी में एक छात्र को क्या-क्या दिक़्क़तें आ सकती हैं. पुस्तक के प्रारूप (epistolary format) के अलावा, बिम्ब-सृष्टि (imagery) का प्रयोग तथा कथन का जीवंत लहजा (breeziness of tone) यह तय करता है कि पढ़ने और समझने की प्रक्रिया उबाऊ ना हो. यह पुस्तक यह भी बताती है कि आनेवाले सत्रों में क़ानून के छात्र अपनी पढ़ायी को किस प्रकार दृढ़ता तथा मज़बूती से जारी रखें, क़ानून के छात्र विश्वविद्यालयों में क्या करते हैं, परीक्षाओं में अच्छे अंक कैसे हासिल करें, किस तरह से छात्र क़ानून की पढ़ायी के दौरान आनेवाली चुनौतियों का सामना करें, पढ़ायी में मदद के लिये किन पाठ्येतर पुस्तकों तथा वेबसाइट्स का चुनाव करें, क़ानून की डिग्री हासिल करने के बाद उनके लिये कौन से रास्ते खुले हैं, एक सफल अधिवक्ता बनकर किस प्रकार आगे वे अपना पूरा भविष्य बदल सकते हैं, वग़ैरह .. वग़ैरह . कुल मिलाकर यह पुस्तक यह बताती है; कि, एक सफल लॉयर बनने से पहले, किस तरह से, विभिन्न चरणों में, एक सफल क़ानून का छात्र बनने की प्रक्रिया में शामिल हुआ जाता है. 

यह पुस्तक बस ब्रिटेन के क़ानून के छात्रों के लिये ही नहीं, बल्कि, भारतीय क़ानून के छात्रों के लिये भी उपयोगी है. चुकि, यह पुस्तक, क़ानून विषय के व्यावहारिक तथा वास्तविक पक्ष को सामने रखती है; इसलिये, यह उन छात्रों के रुचिकर हो जाती है, जो, अभी क़ानून की पढ़ायी के बस शुरुआती दौर में ही हैं. इस उपन्यास में कई व्यावहारिक उदाहरण तथा स्थितियों का वर्णन है, जिनमें, भविष्य में एक लॉयर स्वयं को उलझा हुआ पा सकता है; और, वह किन-किन तरीक़ों को अपना कर, उन परिस्थितियों से निजात पा सकता है. इस पुस्तक में कुछ ऐसे प्रश्न भी दिये गये हैं, जहाँ, छात्रों को यह अनुमान लगाना है कि वहाँ कौन से क़ानून लागू होंगे. Nicholas McBride ने छात्रों को यह सुझाया है कि पढ़ने के क्रम में वे यह भूल जायें कि क़ानून को पढ़ना ज्ञान के एक अथाह सागर में गोते लगाने जैसा है; बल्कि, यह सोंच रखें, कि, जो पुस्तक भी उनके सामने है उसे उन्हें एक आलोचनात्मक नज़रिया विकसित करते हुये बस पढ़ते चला जाना है. क़ानून से सम्बन्धित लेखन के सवाल पर वे कहते हैं, कि, एक लॉयर का विश्लेषण तो सूक्ष्म होना चाहिये; लेकिन, लेखन में सूक्ष्मता नहीं बल्कि स्पष्टता तथा हथौड़े की चोट करने वाली शैली होनी चाहिये. 

लेखक ने यह चर्चा की है कि किस प्रकार लॉयर्स समाज का एक अभिन्न अंग होते हैं; और, समाज को न्याय दिलाने की इस यात्रा में उन्हें किन-किन कौशलों का विकास करना होगा. जिन व्यावहारिक कौशलों की लेखक ने बात की है; उनमें से प्रमुख हैं,  सही तर्क रखना, सोंचने की प्रक्रिया को कठोर बनाना, तथा, मज़बूती से अपनी बातों को अदालत के सामने रखना. इस पुस्तक के द्वारा लेखक ने यह आशा की है, कि, वे राष्ट्र की बौद्धिक क्षमता को बढ़ाने में अपना योगदान दे रहे हैं; और, सम्भवतः उन्होंने ऐसा किया भी है.

Biography 

4. Lord Denning, A Life — Iris Freeman 

Lord (Thompson/Tom) Denning ब्रिटेन के एक प्रसिद्ध, किंतु, सबसे ज़्यादा विवादों में घिरे रहने वाले जज थे. वर्ष 1923 में ये England तथा Wales के बार से जुड़े थे, और वर्ष 1938 में King’s Counsel नियुक्त किये गये थे. वर्ष 1944 में ये जज बने और बाद में House of Lords में Master of Rolls के पद से सेवानिवृत्त हुये. Master of Rolls के पद पर ये बीस वर्षों तक बने रहे, और, उस दौरान, इन्होंने अपने इस पद का इस्तेमाल महज़ क़ानून के विश्लेषण के लिये नहीं, बल्कि, क़ानून बनाने के लिये भी किया. इन्होंने अपने सेवाकाल में ऐसे-ऐसे निर्णय दिये, जिन्होंने, पूरी न्याय-व्यवस्था को राजनीतिक तथा सामाजिक परिवर्तन के केन्द्र में ला खड़ा किया. सेवानिवृत्ति के दौरान इन्होंने कई पुस्तकें लिखीं और लोक-विधि (common law) के सम्बन्ध में समय-समय पर लेखन द्वारा अपने विचारों को प्रकट करते रहे. जज बनने के दौरान ही, ये अपनी स्वतन्त्र सोंच, न्याय के लिये गर्मजोशी भरे अपने रवैय्ये, कटु हास्य तथा लोक-प्रसिद्धि के लिये वांछित गुणों से भरपूर होने के कारण जाने जाने लगे थे. व्यक्तिगत तौर पर, अपरिवर्तनवादी राजनीति की ओर झुकाव होते हुये भी, इन्होंने सामाजिक नीतियों के उदारीकरण के लिये ठोस कदम उठाये; तथा, हमेशा ही, व्यक्तिगत अधिकारों के लिये खड़े रहे. ईसाई वैवाहिक बन्धनों के पक्ष में अचल आस्था के बावजूद भी इन्होंने तलाक़ कि प्रक्रिया को सहज बनाया तथा औरतों के सम्पत्ति-सम्बन्धित अधिकारों को सुदृढ़ बनाया. Profumo Affair पर इनके द्वारा बनायी गयी रिपोर्ट 1960 के दशक के महत्त्वपूर्ण दस्तावेज़ों में शामिल थी. इस महत्त्वपूर्ण जीवनी को लिखते समय Iris Freeman ने Lord Denning तथा उनके परिवार के सदस्यों से भी सम्पर्क साधा था. वर्ष 1993 में ब्रिटेन के Hutchinson प्रकाशन द्वारा यह पुस्तक प्रकाशित की गयी.

Non-fiction 

5. About Law — Tony Honoré

यह पुस्तक भावी क़ानून के छात्रों के लिये इस विषय का संक्षिप्त किन्तु सारगर्भित परिचय देती है. आम पाठक भी जो क़ानून के क्षेत्र में बौद्धिक रुचि रखते हैं, उनके लिये यह पुस्तक एक अच्छी शुरुआत हो सकती है. 

6. Landmarks in the Law — Lord Denning 

लॉर्ड डेनिंग की परिचित, जीवंत तथा स्पष्ट भाषा शैली, में लिखी गयी यह पुस्तक प्रसिद्ध ऐतिहासिक व्यक्तियों तथा मामलों के ऊपर चर्चा करती है, जिनसे आम तौर पर पाठक परिचित होते हैं. इस पुस्तक में, ये मामले, विभिन्न शीर्षकों — जैसे कि, घोर राज-द्रोह (High Treason), प्रेस की स्वतन्त्रता (Freedom of Press) तथा हत्या (Murder) इत्यादि — के अन्तर्गत, एक समूह के रूप में चर्चा के लिये रखे गये हैं. उदाहरण के लिये, घोर राज-द्रोह के पाठ में, William Joyce, Sir Roger Casement तथा Sir Walter Raleigh की कहानियाँ सम्मिलित की गयी हैं. इन सभी चरित्रों तथा इनसे जुड़े मामलों के बीच सदियों का अन्तर हो सकता है, लेकिन, महत्त्वपूर्ण बात यह है कि ये सभी मामले, इतिहास के महत्त्वपूर्ण संवैधानिक मुद्दों को उठाते दिखते हैं.

7. Learning the Law — Glanville Williams

यह पुस्तक वर्ष 1945 में पहली बार प्रकाशित हुयी थी. लगभग, पिछले पाँच दशकों से, यह पुस्तक लोक-विधि (common-law) प्रणाली को अपनाने वाले देशों के, विधि-स्नातक छात्रों के लिये, एक महत्त्वपूर्ण पुस्तक रही है. इस पुस्तक में क़ानून सम्बन्धी पद्धतियों तथा युक्तियों का एक सीधा और स्पष्ट परिचय है.

8. Jeremy Hutchinson’s Case Histories — Thomas Grant

Jeremy Hutchinson, उन्नीस सौ साठ, सत्तर तथा अस्सी के दशक में वकालत की दुनिया के एक चमकते सितारे थे. यह वह समय था जब अदालत में ऐसे मामले आ रहे थे, जिनके फ़ैसले सामाजिक जीवन में महत्त्वपूर्ण बदलाव लाने वाले हुआ करते थे. Jeremy Hutchinson, इसी दौर के एक क्रिमिनल लॉयर थे, और इन मामलों में इनकी एक अविस्मरणीय भूमिका रही थी. इस पुस्तक में Jeremy Hutchinson द्वारा लड़े गये सबसे महत्त्वपूर्ण मुक़द्दमों का निरीक्षण किया गया है, जिनके ज़रिये, हम युद्धोत्तर ब्रिटेन के सामाजिक, राजनीतिक तथा सांस्कृतिक इतिहास की एक झलक पा सकते हैं.

9. Law’s Empire — Ronald Dworkin 

Ronal Dworkin अपनी धारदार तथा स्पष्ट लेखन शैली के लिये जाने जाते हैं. Law’s Empire में इन्होंने Anglo-American न्याय- व्यवस्था की कार्य-प्रणाली तथा इस व्यवस्था के मूलभूत सिद्धान्तों की सशक्त व्याख्या की है. यह पुस्तक लेखक द्वारा दिये गये क़ानून के सिद्धान्तों की एक लम्बी प्रस्तुति है; जिस पर, आज भी, क़ानून के विद्वान, न्यायाधीश, छात्र तथा राजनीतिक कार्यकर्ता बहस करते दिखायी देते हैं.

10. Winning Arguments — Jay Heinrichs 

आदिकाल से ही, मनुष्य समाज में हर तरफ़, समझाने, फुसलाने तथा सही-ग़लत बातों को मनवाने का माहौल रहा है; यह काम चाहे राजनेताओं के द्वारा किया जा रहा हो, या विज्ञापनों, धर्मगुरुओं या मीडिया के द्वारा. किस तरह से बहस में अपना पलड़ा भारी रखना है; इस उद्देश्य की प्राप्ति हेतु, यह पुस्तक, इस सम्बन्ध में युगों से एकत्रित विवेक का निचोड़ आपके सामने रखेगी, जिसमें, Aristotle तथा Stalin से लेकर Yoda तथा Monty Python तक से लिये विचार सम्मिलित होंगे. कुल मिलाकर, यह पुस्तक, आपको बहस जीतने के अनेकों तरीक़े, विभिन्न उदाहरणों की मदद से, बतायेगी. 

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